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लखीमपुर हिंसा की जांच को लेकर सुप्रीमकोर्ट की यूपी सरकार को फिर फटकार

नई दिल्ली। लखीमपुर हिंसा मामले में आज सुप्रीमकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यूपी सरकार द्वारा की जा रही एसआईटी जांच पर असंतोष जताया। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच “उस तरह से नहीं हो रही है जैसी हमें उम्मीद थी”। इसने वीडियो साक्ष्य के संबंध में फोरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त करने में देरी पर भी ध्यान दिया।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने मामलों में आरोप पत्र दाखिल होने तक जांच की निगरानी के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों, न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन या रंजीत सिंह के नामों का सुझाव दिया।

देश की सर्वोच्च अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर एक बार फिर से नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा है कि हमने 10 दिन का समय दिया था। इसके बाद भी स्टेटस रिपोर्ट में कुछ भी नही हैं। सिवाय इतना कहने के कि गवाहों से पूछताछ की गई है।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और गरिमा प्रसाद के प्रतिनिधित्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार से शुक्रवार तक जवाब मांगा है।

इससे पहले, पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को गवाह संरक्षण योजना, 2018 के तहत गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अन्य गवाहों के बयान दर्ज करने और विशेषज्ञों द्वारा डिजिटल साक्ष्य की परीक्षा में तेजी लाने का निर्देश दिया था।

गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पुलिस अब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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