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सपा के साथ गठबंधन से यू टर्न ले सकते हैं जयंत चौधरी!, कांग्रेस से बढ़ीं नजदीकियां

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने भले ही राष्ट्रीय लोकदल से अपने गठबंधन का औपचारिक एलान कर दिया है लेकिन सूत्रों की माने तो राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी अभी गठबंधन को लेकर अपनी अंतिम राय नहीं बना पाए हैं।

इस बीच हाल ही में लखनऊ से दिल्ली की फ्लाइट में जयंत चौधरी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की मुलाकात और एयरपोर्ट पर बातचीत के बाद अब इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि रालोद नेता जयंत चौधरी की कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ रही हैं।

प्रियंका गांधी और जयंत चौधरी की आकस्मित मुलाकात के बाद टेंशन में आई समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आनन् फानन में बयान दिया कि समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन हो चुका है सिर्फ सीटों के बंटवारे पर फैसला बाकी है।

ज़ाहिर है किसान आंदोलन के बीच जाट लैंड कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल से बड़ा फायदा हो सकता है। इसलिए रालोद से गठबंधन को लेकर अखिलेश यादव की चिंता एक सामान्य बात नहीं है।

सपा से नाराज़ हैं जाट लैंड के किसान:

गौरतलब है कि राष्ट्रीय लोकदल और कांग्रेस में पहले भी गठबंधन रह चुका है। रालोद नेता जयंत चौधरी के पिता स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह यूपीए सरकार में मंत्री रहे हैं। वहीँ जानकारों की माने तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाटलैंड के किसान समाजवादी पार्टी से खुश नहीं हैं।

मेरठ, मुज़फ्फरनगर, शामली, बागपत जैसे इलाको के किसान पूर्व की अखिलेश सरकार में आज़म खान को ज़्यादा छूट देने से नाराज़ हैं। कई जाट किसानो का कहना है कि यदि सपा फिर से यूपी की सरकार में आई तो एक बार फिर सरकार चलाने का जिम्मा आज़म खान को दे दिया जायेगा। इतना ही नहीं
मुज़फ़्फरनगर दंगो के दौरान सपा नेता और पूर्व केबिनेट मंत्री आज़म खान की भूमिका पर आज भी सवाल उठा रहे हैं।

वहीँ जाट लैंड के किसान भूमि अधिग्रहण कानून लाने के लिए कांग्रेस के लिए आज भी उत्साहित हैं। सपा-रालोद गठबंधन की दशा में जाट लैंड के किसानो की सपा से नाराज़गी का खामियाजा रालोद को न भुगतना पड़े, शायद जयंत चौधरी इसी सवाल पर मंथन कर रहे हैं।

दरअसल राष्ट्रीय लोकदल की महत्वाकांक्षा बहुत अधिक नहीं है। रालोद का लक्ष्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 30-35 सीटें हैं जिन पर जाट मतदाताओं की अच्छी तादाद है। ये सीटें सहरानपुर, बागपत, शामली, मुज़फ्फरनगर, मेरठ, मथुरा, हाथरस, अलीगढ, बिजनौर और अमरोहा जिलों से संबंधित हैं।

ऐसे में जयंत चौधरी किसी के साथ भी गठबंधन करें, उन्हें अपनी पार्टी के परम्परागत जाट वोट वाली सीटें गठबंधन में आसानी से मिलना तय है। इसलिए माना जा रहा है कि जयंत चौधरी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर जाट समुदाय की नाराज़गी मोल नहीं लेना चाहेंगे।

हालांकि अभी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में ख़ासा समय बाकी है। समाजवादी पार्टी का ओम प्रकाश राजभर की पार्टी से गठबंधन हो चुका है, और शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से गठबंधन या विलय को लेकर बातचीत चल रही है। ऐसे में देखना है कि राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी सपा के साथ गठबंधन कर चुनाव में जाते हैं या वे चुनाव से पहले ही सपा से गठबंधन पर यूटर्न लेकर कांग्रेस से गठबंधन करेंगे ?

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