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UPA-2 की सरकार गिराने की साजिश रचने के लिए माफ़ी मांगें पूर्व CAG विनोद राय और पीएम मोदी: कांग्रेस

गुवाहाटी। यूपीए-2 की सरकार के दौरान तत्कालीन सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) विनोद राय द्वारा कथित तौर पर 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के नाम का इस्तेमाल करने और बाद में अपना झूठ स्वीकार करने के मुद्दे पर आज कांग्रेस ने मोदी सरकार और पूर्व सीएजी विनोद राय पर सीधा हमला बोला।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि डा मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-2 की सरकार को गिराने की कथित साजिश में अपनी ‘कुटिल भूमिका’ के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और तत्कालीन सीएजी विनोद राय देश से बिना शर्त माफी मांगें। पीएम नरेंद्र मोदी भी इस साजिश में शामिल थे।

कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने दावा किया कि हाल ही में कांग्रेस नेता संजय निरुपम से राय के माफी मांगने के साथ ही यूपीए सरकार को अस्थिर करने की साजिश का पर्दाफाश हो गया है। उन्होंने कहा कि राय ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर CAG की रिपोर्ट में सिंह का नाम नहीं लेने के लिए दबाव डालने वाले सांसदों में से एक के रूप में गलत तरीके से निरुपम का नाम लेने के लिए माफी मांगी।

वल्लभ ने गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “यूपीए सरकार को गिराने की आपराधिक साजिश इस तरह से काफी बड़ी है। देश को पता होना चाहिए कि सच की पुष्टि हो चुकी है… भारतीय जनता पार्टी ने हमारी सरकार को बदनाम करने की साजिश रची थी और विनोद राय इसमें एक पक्ष थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विनोद राय और अन्य सभी राष्ट्र से बिना शर्त माफी मांगें और साजिश में अपनी बेईमान भूमिका को स्वीकार करें।”

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि कहा कि यूपीए शासन के दौरान “2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के आवंटन में सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुकसान” राय द्वारा एक ‘अनुमानित’ संख्या थी, जिसका कोई प्रमाण नहीं था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “भाजपा, आरएसएस, AAP नेता अरविंद केजरीवाल और कई अन्य लोगों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार को सत्ता में किसी भी तरह लाने के उद्देश्य से इस ‘शातिर और दुर्भावनापूर्ण अभियान’ का सहारा लिया था।”

बता दें कि पूर्व सीएजी विनोद राय ने हाल ही में निरुपम द्वारा दायर मानहानि मामले के जवाब में उनसे बिना शर्त माफी मांगी है। यूपीए-2 की सरकार के दौरान देश का ‘नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक’ रहते हुए विनोद राय ने आरोप लगाया था कि निरुपम उन सांसदों में से एक थे, जिन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम को टूजी स्पेक्ट्रम नीलामी पर सरकार की ऑडिट रिपोर्ट से बाहर रखने के लिए दबाव बनाना चाहा था। विनोद राय ने अपने माफीनामे में कहा है कि उन्होंने संजय निरुपम का नाम गलती से लिया था।

इतना ही नहीं विनोद राय ने एक टीवी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कुछ मंत्रियों द्वारा विवादास्पद 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटन की प्रक्रिया पर चिंता जताने के बावजूद, इसे रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस इंटरव्यू को दो अखबारों ने भी प्रकाशित किया था। विनोद राय ने दावा किया था कि कुछ कांग्रेस सांसदों ने उन्हें 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटन की ऑडिट रिपोर्ट से मनमोहन सिंह का नाम बाहर रखने को कहा था।

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