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सुप्रीमकोर्ट ने कहा “कोर्ट के बाहर सुलझाएं मंदिर मस्जिद विवाद, नही सुलझे तो हस्तक्षेप को तैयार”

नई दिल्ली । बाबरी मस्जिद राममंदिर विवाद में मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है और दोनो ही पक्ष आपसी सहमति के साथ इसका हल निकालें। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि इस मामले में आवश्यकता हुई तो कोर्ट हस्तक्षेप करने को तैयार है।

सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि हम मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। राम जहां पैदा हुए मंदिर वहीं बनेगा, मस्जिद को सरयू नदी के उस पार बनाया जाना चाहिए। हमें उम्मीद है कि मुस्लिम समुदाय इस सकारात्मक प्रस्ताव पर विचार करेगा।

याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर दोनों पक्ष सहमति से इसका फैसला करते हैं तो कोर्ट भी इसमें मध्यस्थता के लिए तैयार है। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।

बता दें कि इलाहबाद कोर्ट ने भी इस मामले पर 30 सितंबर 2010 को सुनवाई की थी। उनकी तरफ से फैसला करके 2.77 एकड़ की उस जमीन का बंटवारा कर दिया गया था। जिसमें जमीन को तीन हिस्सों में बांटा गया था। जिसमें ने एक हिस्सा हिंदू महासभा को दिया गया जिसमें राम मंदिर बनना था। दूसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को और तीसरा निरमोही अखाड़े वालों को। लेकिन फिर 9 मई को इलाहबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया था।

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