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सरकार दखल न दे, तीन तलाक पर लोगों की ग़लतफ़हमी होगी दूर : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

नई दिल्ली। देश में मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर फैली गलत फहमियों को दूर करने के लिये आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सोशल मीडिया का सहारा लेगा। बोर्ड कार्यकारिणी की आगामी 15 अप्रैल को शुरू होने वाली दो दिवसीय बैठक में इस सिलसिले में कार्ययोजना तैयार की जाएगी तथा तीन तलाक और अयोध्या विवाद के बातचीत से हल समेत कई अहम मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि अगले डेढ़ साल में तीन तलाक को खत्‍म कर दिया जाएगा। इस मामले में उन्होंने सरकार को दखल न देने को कहा है।

बोर्ड के उपाध्‍यक्ष डॉक्‍टर सईद सादिक ने अंग्रेजी न्‍यूज चैनल न्‍यूज 18 को यह बयान दिया और कहा कि इस मामले में सरकार को दखल देने की जरुरत नहीं है। यह बयान बोर्ड के उस दावे के दो दिन बाद आया है जिसमें कहा गया था कि देशभर की साढ़े तीन करोड़ मुस्लिम महिलाओं ने शरीयत और तीन तलाक का समर्थन किया है।

बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने मंगलवार को बताया कि बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक आगामी 15 और 16 अप्रैल को लखनउ स्थित नदवा में आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि बोर्ड मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के लिये सोशल मीडिया के जरिये आम लोगों से जुड़ेगा और शरई कानूनों को वास्तविक रूप में सामने रखेगा। बोर्ड की बैठक में इसकी कार्ययोजना तय की जाएगी।

मौलाना रशीद ने बताया कि बैठक के एजेंडा में मुख्य रूप से तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी मामले की पैरवी और बाबरी मस्जिद विवाद को बातचीत के जरिये सुलझाने की सुप्रीम कोर्ट की पेशकश पर विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही बोर्ड की महिला शाखाओं को और मजबूत करने के रास्तों पर भी चर्चा होगी। मालूम हो कि तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लम्बित मुकदमे में ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक पक्षकार है।

मौलाना रशीद ने बताया कि बाबरी मस्जिद का मुद्दा बेहद अहम है और बैठक में यह निर्णय लिया जा सकता है कि इसका बातचीत के जरिये हल का कोई रास्ता खुला है या नहीं। उन्होंने बताया कि बोर्ड अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक 15 अप्रैल की शाम को शुरू होगी।

मौलाना रशीद ने बताया कि इस बैठक में पूर्व में कोलकाता में हुई बैठक में लिये गये फैसलों को अमली जामा पहनाने के तरीकों पर विचार किये जाने के साथ—साथ बोर्ड की विभिन्न समितियों की रपट पेश की जाएंगी। इसके अलावा इन समितियों को और सक्रिय बनाने के रास्तों पर भी बात होगी।

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