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मुस्लिम नहीं हैं देश के सबसे बड़े बूचड़खाने के मालिक, कारोबार का बड़ा हिस्सा गैर मुस्लिमो के पास

ब्यूरो । जब देश में बूचड़ खानों की बात उठती है तो आम धारणा है कि सिर्फ मुस्लिम ही बूचड़खाने चलाते हैं। आमतौर पर लोगों की सोच यही होती है कि कोई गैर मुस्लिम बूचड़खानों का मालिक कैसे हो सकता है क्यों कि यहाँ जानवरो को काटा जाता है। हिन्दू धर्मशास्त्रो के अनुसार जानवरो की हत्या बड़ा पाप है।

एक बड़ी सच्चाई यह है कि देश में चल रहे बूचड़खानों में बड़े बूचड़खानों के मालिक मुस्लिम समुदाय के नहीं बल्कि गैर मुस्लिम समुदायों से हैं। हालाँकि गैरमुस्लिमो द्वारा चलाये जा रहे बूचड़खानों के नाम भी इस तरह रखे गए हैं कि वे पहली नज़र में किसी मुस्लिम व्यवसायी से जुड़े नज़र आते हैं।

अल कबीर एक्स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को देश का सबसे बड़ा बूचड़ खाना माना जाता है। यह तेलंगाना के मेडक जिले में रूद्रम गांव में है।यह देश में अन्य बूचड़खानों से कई गुना बड़ा है और तकरीबन 400 एकड़ में फैले इस बूचड़खाने के मालिक सतीश सब्बरवाल हैं। जो एक गैर मुस्लिम समुदाय से हैं।

मुंबई के नरीमन प्वॉइंट स्थित मुख्यालय से मध्य-पूर्व के कई देशों को बीफ निर्यात किया जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा बीफ निर्यातक भी है और मध्य-पूर्व के कई शहरों में इसके दफ्तर हैं। अल कबीर के दफ्तर दुबई, अबू धाबी, कुवैत, जेद्दा, दम्मम, मदीना, रियाद, खरमिश, सित्रा, मस्कट और दोहा में हैं।

दुबई दफ्तर से फोन पर बातचीत में अल कबीर मध्य पूर्व के चेयरमैन सुरेश सब्बरवाल ने बीबीसी से कहा, “धर्म और व्यवसाय दो बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं और दोनों को एक दूसरे से मिला कर नहीं देखा जाना चाहिए। कोई हिंदू बीफ व्यवसाय में रहे या मुसलमान ब्याज पर पैसे देने के व्यवसाय में रहे तो क्या हर्ज़ है?” अल कबीर ने बीते साल लगभग 650 करोड़ रुपये का कुल व्यवसाय किया था।

अरेबियन एक्सपोर्ट्स

अरेबियन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लमिटेड के मालिक सुनील कपूर हैं। इसका मुख्यालय मुंबई के रशियन मैनशन्स में है। कंपनी बीफ के अलावा भेड़ के मांस का भी निर्यात करती है। इसके निदेशक मंडल में विरनत नागनाथ कुडमुले, विकास मारुति शिंदे और अशोक नारंग हैं।

एमकेआर एक्सपोर्ट्स

एमकेआर फ्रोजन फूड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक मदन एबट हैं। कंपनी का मुख्यालय दिल्ली में है। एबट कोल्ड स्टोरेजेज प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना पंजाब के मोहाली जिले के समगौली गांव में है। इसके निदेशक सनी एबट हैं।

अल नूर एक्सपोर्ट्स

अल नूर एक्सपोर्ट्स के मालिक सुनील सूद हैं। इस कंपनी का दफ्तर दिल्ली में हैय। लेकिन इसका बूचड़खाना और मांस प्रसंस्करण संयंत्र उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के शेरनगर गांव में है। इसके अलावा मेरठ और मुबई में भी इसके संयंत्र हैं। इसके दूसरे पार्टनर अजय सूद हैं। इस कंपनी की स्थापना 1992 में हुई और यह 35 देशों को बीफ निर्यात करती है।

एओवी एक्सपोर्ट्स

एओवी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना उत्तर प्रदेश के उन्नाव में है। इसका मांस प्रसंस्करण संयंत्र भी है। इसके निदेशक ओपी अरोड़ा हैं। यह कंपनी साल 2001 से काम कर रही है। यह मुख्य रूप से बीफ निर्यात करती है। कंपनी का मुख्यालय नोएडा में है। अभिषेक अरोड़ा एओवी एग्रो फूड्स के निदेशक हैं। इस कंपनी का संयंत्र मेवात के नूह में है।

स्टैंडर्ड फ्रोजन फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड

इसके प्रबंध निदेशक कमल वर्मा हैं। इस कंपनी का बूचड़खाना और सयंत्र उत्तर प्रदेश के उन्नाव के चांदपुर गांव में है। इसका दफ्तर हापुड़ के शिवपुरी में है।

पोन्ने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट्स

पोन्ने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट्स के निदेशक एस सास्ति कुमार हैं। यह कंपनी बीफ के अलावा मुर्गी के अंडे और मांस के व्यवसाय में भी है। कपंनी का संयंत्र तमिलनाडु के नमक्काल में परमति रोड पर है।

अश्विनी एग्रो एक्सपोर्ट्स

अश्विनी एग्रो एक्सपोर्ट्स का बूचड़खाना तमिलनाडु के गांधीनगर में है। कंपनी के निदेशक के राजेंद्रन धर्म को व्यवसाय से बिल्कुल अलग रखते हैं। वे कहते हैं, “धर्म निहायत ही निजी चीज है और इसका व्यवसाय से कोई ताल्लुक नहीं होना चाहिए.” राजेंद्रन ने इसके साथ यह जरूर माना कि उन्हें कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कई बार ‘स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें परेशान’ किया है।

महाराष्ट्र फूड्स प्रोसेसिंग

महाराष्ट्र फूड्स प्रोसेसिंग एंड कोल्ड स्टोरेज के पार्टनर सन्नी खट्टर का भी यही मानना है कि धर्म और धंधा अलग अलग चीजें हैं और दोनों को मिलाना गलत है। वो कहते हैं, “मैं हिंदू हूं और बीफ व्यवसाय में हूं तो क्या हो गया? किसी हिंदू के इस व्यवसाय में होने में कोई बुराई नहीं है। मैं यह व्यवसाय कर कोई बुरा हिंदू नहीं बन गया।” इस कंपनी का बूचड़खाना महाराष्ट्र के सतारा जिले के फलटन में है। इसके अलावा हिंदुओं की ऐसी कई कंपनियां हैं, जो सिर्फ बीफ निर्यात के क्षेत्र में हैं। उनका बूचड़खाना नहीं है, पर वे मांस प्रसंस्करण, पैकेजिंग कर निर्यात करते हैं।

कनक ट्रेडर्स ऐसी ही एक कंपनी है। इसके प्रोप्राइटर राजेश स्वामी ने कहा, “इस व्यवसाय में हिंदू-मुसलमान का भेदभाव नहीं है। दोनों धर्मों के लोग मिलजुल कर काम करते हैं। किसी के हिंदू होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।”

वे यह भी कहते हैं कि बूचड़खाने बंद हुए तो हिंदू-मुसलमान दोनों को नुकसान होगा। बड़ी तादाद में हिंदू मध्यम स्तर के प्रबंधन में हैं। वे कंपनी के मालिक तो नहीं, लेकिन निदेशक, क्वॉलिटी प्रबंधक, सलाहकार और इस तरह के दूसरे पदों पर हैं।

इनपुट साभार बीबीसी से भी

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