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बीजेपी को जिताने वाले एग्जिट पोल प्रकाशन के पीछे संघ !

नई दिल्ली । जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव चल रहे थे तब पहले चरण के मतदान के बाद चुनाव आयोग की मनाही की बावजूद प्रमुख समाचार पत्र दैनिक जागरण के अंग्रेजी पोर्टल पर एग्जिट पोल पब्लिश किये जाने के पीछे कोई और नही बल्कि आरएसएस के एक कार्यकर्ता का हाथ बताया जा रहा है।

हालांकि जल्द ही इस पोल को वेबसाइट से हटा दिया गया पर इससे मिले ‘संदेश’ को भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं द्वारा पूरे उत्तर प्रदेश में ह्वाट्सऐप के ज़रिये फैला दिया गया। चुनाव आयोग की सख्ती के बाद इस मामले में इस एग्ज़िट पोल के प्रकाशन के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने दैनिक जागरण के ऑनलाइन संपादक शेखर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि संस्थान के सीईओ संजय गुप्ता के अनुसार यह एग्ज़िट पोल विज्ञापन विभाग द्वारा छापा गया था।

‘द वायर’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दैनिक जागरण में सीनियर बिजनिस एग्ज़ीक्यूटिव के पद पर कार्यरत तन्मय शंकर द्वारा भेजा गया था जो उस समय जागरण प्रकाशन और एमएमआई ऑनलाइन लिमिटेड (जागरण समूह की डिजिटल इकाइयां संभालने वाली कंपनी) के बिज़नेस और मार्केटिंग हेड थे और इसका प्रकाशन एमएमआई की हेड सुकृति गुप्ता की सहमति से था।

भाजपा केे एक कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बराबर में बैठे दैनिक जागरण एग्जीक्यूटिव तन्मय शंकर

‘द वायर’ के अनुसार जागरण के यह एग्जीक्यूटिव तन्मय शंकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कार्यकर्ता भी हैं। रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण के बाद बीजेपी को जिताने वाला एग्जिट पोल प्रकाशित करने का मकसद जनता को मिसगाइड करना था। रिपोर्ट में तन्मय शंकर के ईमेल का उल्लेख करते हुए 10 फरवरी को तन्मय द्वारा विभिन्न संपादकीय विभागों को भेजे हुए एक ईमेल में पेज एक के स्लॉट पर http://rdiindia.com द्वारा किए गए एक प्री-पोल एनालिसिस यानी चुनाव पूर्व विश्लेषण को छापने की बात कही गई थी।

‘द वायर’ की इस सनसनीखेज रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस सुनील आर नामक व्यक्ति के नाम से drsrdi@gmail.com के माध्यम से यह ईमेल भेजा गया था वह यूआरएल गुड़गांव की एक ह्यूमन रिसोर्स कंपनी ‘रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल’ का है, पर इसका किसी भी तरह के चुनावी सर्वे से कोई लेना-देना नहीं है।

‘द वायर’ के इस खुलासे के बाद यह कहा जा सकता है कि जागरण की अंग्रेजी वेबसाइट में छापा गया एग्जिट पोल भ्रामक और मनगढ़ंत था । उसमे न कोई सच्चाई थी और न ही ऐसा कोई एग्जिट पोल जारी करने के लिए किसी सर्वेक्षण का आयोजन किया गया था ।

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