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पंजाब में वीआईपी कल्चर ख़त्म करने को कैप्टेन का एक और बड़ा फैसला

चंडीगढ़। पंजाब में सरकार बनने के बाद कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने गाड़ियों से लालबत्ती हटाने के आदेश के बाद अब वीआईपी कल्चर खत्म करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने अब अपने सहित सूबे के विभिन्न नेताओं और सरकार के कई आला अफसरों की सुरक्षा में तैनात लगभग 2000 कर्मचारी कम कर दिए हैं। सीएम की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया।

बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव सुरेश कुमार, डीजीपी सुरेश अरोड़ा और एडीजीपी (इंटेलीजेंस) दिनकर गुप्ता भी शामिल थे। बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में अब तक 1392 जवान व अधिकारी तैनात थे, जो अब घटकर 1016 रह गए हैं। यानी कि यह कटौती 27 फीसदी है। इसके अतिरिक्त संवैधानिक और सरकारी अधिकारियों की श्रेणियों में भी 1500 सुरक्षा कर्मचारी वापस बुलाए गए हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने पहले ही अपने सफर करने वाले रूटों पर सुरक्षा जवानों की तैनाती बंद करने के आदेश जारी किए थे। प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा संबंधी जायजा लेने के लिए अगली बैठक के बाद कुछ और सुरक्षा कर्मचारियों को कम किया जा सकता है। इसका फैसला, खतरे की आशंकाओं संबंधी ताजा रिपोर्टों के आधार पर होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह जरूरत से अधिक किसी प्रकार की अतिरिक्त सुरक्षा नहीं लेना चाहते।

शुक्रवार को बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिस एवं अन्य एजेंसियों को मौजूदा सुरक्षा नीति संबंधी जायजा लेने के भी निर्देश दिए जो कि पंजाब मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई है। वर्ष 2013 में गृह मामले एवं न्याय विभाग द्वारा यह अधिसूचित की गई है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एजेंसियों से जायजा पूरा होने के बाद इसकी रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है

मुख्यमंत्री ने किसी भी व्यक्ति के लिए खतरे की आशंका संबंधी ताजा स्थिति के मद्देनज़र सुरक्षा मुहैया करवाने की जरूरत पर बल दिया। मौजूदा सुरक्षा नीति 3 वर्ष पुरानी होने के कारण मुख्यमंत्री ने पुलिस को हिदायत दी कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट को आधार बनाकर ही सुरक्षा प्रदान करने का फैसला किया जाए।

कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने सत्ता में आने के बाद सुरक्षा का जायजा लेने के लिए शुक्त्रस्वार को दूसरी बैठक की। बीते मार्च में डीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) पंजाब के नेतृत्व वाली कमेटी की हुई बैठक के दौरान सुरक्षा का जायजा लिया गया, जिसमें विभिन्न श्रेणीयों तहत सुरक्षा हासिल कर रहे व्यक्तियों से 749 पुलिस कर्मचारी एवं अर्धसैनिक बल वापिस बुला लिये गये थे।

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