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तीन तलाक कहकर छोड़ दिया या बिना तलाक दिए छोड़ दिया, न्याय तो दोनो को मिलना चाहिए!

ब्यूरो(राजाज़ैद)। इस समय देश में तीन तलाक के मुद्दे पर बहस छिड़ी है। तीन तलाक कितना जायज़ है इस पर लोगों की अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं और अपनी अपनी राय हैं। कुल मिलाकर महिलाओं के साथ न्याय किये जाने की मांग उठ रही है। जब महिलाओं के साथ न्याय किये जाने की बात हो रही है तो हमारा नजरिया भी एक होना चाहिए।

महिलाओं के लिए न्याय की आवाज़ उठाते समय उनके धर्म को आधार न बनाया जाए बल्कि यह सोच कर फैसला होना चाहिए कि महिला किसी भी जाति या धर्म की हो उसे न्याय मिलना चाहिए ।

सिर्फ तीन तलाक कह कर छोड़ दी गयी महिलाओं की बात ही क्यों की जाए ? उनकी भी बात की जानी चाहिए जिन महिलाओं को बिना तलाक दिए उनके पति ने वर्षो से अकेले छोड़ रखा है। न्याय और नजरिया सभी महिलाओं के लिए एक समान होना चाहिए।

मैं किसी धर्म विशेष की बात नहीं कर रहा। मैं तीन तलाक को गलत या सही नही कह रहा। मैं महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और उनके साथ न्याय किये जाने की बात कर रहा हूँ। बड़े आश्चर्य की बात यही है कि तीन तलाक को महिलाओं के अधिकारों का हनन बताकर जो लोग उन्हें न्याय दिलाने की वकालत कर रहे हैं वे उन महिलाओं की बात नहीं कर रहे जिन्हें बिना तलाक दिए उनके पतियों ने तलाकशुदा जैसे ज़िन्दगी जीने को मजबूर कर दिया है।

मुझे यह देख कर बड़ी हैरानी हुई कि सोशल साइट्स पर जो लोग तीन तलाक को मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार बता रहे हैं उन लोगों से जब भी यह कहा जाता है कि वे उन महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए क्या करेंगे जिन्हें बिना तलाक दिए उनके पति ने वर्षो से छोड़ रखा है? यह सवाल उठते ही वे आग बबूला हो उठते हैं । कई लोगों के चेहरे लाल हो जाते हैं ऐसा लगता है जैसे उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया हो। उनका यह हाल तब है जब मेरे सवाल में किसी धर्म या जाति विशेष की महिलाओं का कोई ज़िक्र नही होता।

मैं सीधा सवाल पूछता हूँ कि “जो लोग तीन तलाक की शिकार महिलाओं के लिए आवाज़ उठाना चाहते हैं तो उन महिलाओं के लिए भी आवाज़ उठायें जिन्हें उनके पति ने बिना तलाक दिए वर्षो से छोड़ रखा है।” आप मेरे प्रश्न को पढ़कर फैसला कीजिये क्या आपको मेरे सवाल में कहीं यह लगा कि मैं किसी को व्यक्तिगत तौर पर निशाना बना रहा हूँ ?

आप मेरे सवाल से कितना सहमत हैं ? क्या जब महिलाओं के साथ इन्साफ की बात हो रही हो तो सिर्फ तीन तलाक कह कर छोड़ दी गयी महिलाओं को ही न्याय दिए जाने की बात होनी चाहिए या उन महिलाओं की भी बात हो जिन्हें उनके पति ने बिना तलाक दिए ही छोड़ दिया है।

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