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ट्रिपल तलाक: मुस्लिम लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया ये जवाब

नई दिल्ली । ट्रिपल तलाक मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड ने सोमवार को अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम समाज में तीन बार तलाक, निकाह हलाल और बहुविवाह प्रथा के संबंध में दाखिल याचिकाओं पर 30 मार्च को सुनवाई कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम लॉ बोर्ड ने दाखिल जवाब में कहा है कि बोर्ड के खिलाफ याचिका तामिल (एग्ज़िक्यूशन) योग्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार देने वाली याचिकान पर सुनवाई के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर केंद्र सरकार की दलीलों का विरोध किया।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने हलफनामे में कहा था कि ट्रिपल तलाक को महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन बताने वाले केंद्र सरकार का रुख बेकार की दलील है।

पर्सनल लॉ को मूल अधिकार के कसौटी पर चुनौती नहीं दी जा सकती। ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला जैसे मुद्दे पर कोर्ट अगर सुनवाई करता है तो ये जूडिशियल लेजिस्लेशन की तरह होगा। केंद्र सरकार ने इस मामले में जो स्टैंड लिया है कि इन मामलों को दोबारा देखा जाना चाहिए ये बेकार का स्टैंड है।

पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि मामले में दाखिल याचिका खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि याचिकामें जो सवाल उठाए गए हैं वो जूडिशियल रिव्यू के दायरे में नहीं आते। हलफनामें में पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि पर्सनल लॉ को चुनौती नहीं दी जा सकती।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में यह स्पष्ट कर चुका है कि वह तीन तलाक संबंधी कानूनी प्रस्तावों पर केवल विचार विमर्श करेगा। कोर्ट इस बात पर फैसला नहीं करेगा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक पर अदालतें नजर रखेंगी या नहीं।

केंद्र सरकार की ओर से हलफनामा दायर किया गया जिसमें कहा गया है कि ट्रिपल तलाक के प्रावधान को संविधान के तहत दिए गए समानता के अधिकार और भेदभाव के खिलाफ अधिकार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। केंद्र ने कहा कि लैंगिक समानता और महिलाओं के मान सम्मान के साथ समझौता नहीं हो सकता।

केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत जैसे सेक्युलर देश में महिला को जो संविधान में अधिकार दिया गया है उससे वंचित नहीं किया जा सकता। तमाम मुस्लिम देशों सहित पाकिस्तान के कानून का भी केंद्र ने हवाला दिया जिसमें तलाक के कानून को लेकर रिफॉर्म हुआ है और तलाक से लेकर बहुविवाह को रेग्युलेट करने के लिए कानून बनाया गया है।

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