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उत्तर प्रदेश: अब जिलो के नाम बदलने की माथापच्ची

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार के गठन के बाद शुरूआती कुछ विवादित निर्णयो के पश्चात अब जिलो ने नाम बदलने को लेकर माथापच्ची शुरू हो गयी है। बीजेपी सूत्रों की माने तो उत्तर प्रदेश में कुछ जिलो के नाम मुस्लिम पहचान वाले हैं जिन्हें बदले जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि इन जिलो में गाज़ियाबाद, फ़िरोज़ाबाद, अलीगढ, मुज़फ्फरनगर, इलाहाबाद, फैज़ाबाद, मिर्ज़ापुर सहित 16 जिलो के नाम शामिल हैं।

सूत्रों ने कहा कि बीजेपी से जुड़े साधू संतो का एक खेमा इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिल चुका है। सूत्रों ने कहा कि जिन जिलो के नाम बदले जाने को लेकर माथापच्ची चल रही है उन जिलो के नाम बदले जाने को लेकर विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल पहले से मांग करते आये हैं। वहीँ स्वामी यति नरसिंहा नंद मुस्लिम काल में बदले गए नामों को पौराणिक आधार पर रखने की मुहिम पहले से ही चला रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि देवबंद को देववृंद, अलीगढ को हरिगढ़, मुज़फ्फरनगर को लक्ष्मीनगर, गाजियाबाद को गीता नगर, फ़िरोज़ाबाद को सुहागनगर, फैज़ाबाद को रामनगरी, मिर्ज़ापुर को महाराणा प्रताप नगर और इलाहाबाद को प्रयाग का नाम दिए जाने के लिए विचार चल रहा है।

जिलो के नाम बदले जाने के औचित्य के पर बीजेपी नेताओं का तर्क है कि बसपा शासनकाल में भी कई जिलो के नाम बदले गए थे। इनमे हाथरस को महामायानगर, अमरोहा को ज्योतिबाफूलेनगर, अमेठी को छत्रपतिशाहूजी महाराज नगर, खलीलाबाद को संतकबीरनगर, भदोई को संतरविदासनगर, हापुड़ को पंचशीलनगर, शामली को प्रबुद्धनगर, संभल को भीमनगर , तथा कासगंज को कांशीरामनगर के रूप में नया नाम दिया गया। हम जिलो का नाम बदल कर सांस्कृतिक पहचान को वापस लाने का प्रयास करेंगे।

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